शनिवार, 2 मई 2015

आशियाना न बना गर तेरी गली में ।

चित्र स्रोत - गूगल
आशियाना   न   बना   गर   तेरी   गली   में ।
क़ब्र  के   लिए  जगह   मिले   तेरी  गली  में ।।
होगा   दीदार    तुम्हारा    किसी   बहाने   से ।
सोचकर  आशिक़   भटकता   तेरी  गली  में ।।
घर  का   तेरे  पता   मालूम   नहीं   फ़िर  भी ।
मंजिल   मिलेगी    हमको    तेरी   गली   में ।।
ख़ुदा   के    दर    पे    फ़रियाद    क्या    करें ।
हमको  नज़र  आती  ज़न्नत  तेरी  गली  में ।।
न मक्का न मदीना न काशी की ख़्वाहिश है ।
निकले   हमारी   जान   भी   तेरी   गली  में ।।

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