मंगलवार, 28 अक्तूबर 2014

इस तरह से रोने का मुझे शौक न था

क्यों दिया साथ जब साथ छोड़ना था ?
पकड़ा क्यों हाथ जब हाथ छोड़ना था ?
टूटे   दिल   में   छुपाऊँगा  कब   तक ।
दिल में क्यों बस गए जब दिल तोड़ना था ?
याद तुम्हारी हमको  यहाँ खींच लायी ।
क्यों बुलाया हमको जब नहीं बोलना था ?
तुमने भी किया हमसे बेपनाह प्यार था ।
क्यों  किया  याद  जब  हमें  भूलना  था ?
आँखों को आँसुओं का तोहफा दिया तुमने ।
इस  तरह से रोने का  मुझे  शौक  न  था ।।

4 टिप्‍पणियां:

  1. जो हमारी यादों में बस जाते हैं उन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकता है ..
    बहुत बढ़िया

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    1. कविता जी ! सही कहा आपने लेकिन मुझे एक बात समझ में नहीं आती कि लोग यादों के सहारे जीते हैं या यादों की वजह से जीना मुश्किल होता है।

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