रविवार, 21 दिसंबर 2014

खूब तड़पे वो भी मुझसे जुदा होकर ।

चित्र स्रोत :- गूगल

दास्तान - ए - हक़ीक़त उसने की बयाँ रोकर ।
हम   जाग   गए   गहरी   नींद   से   सोकर ।।
फ़ना   होने   से  पहले   मुझको   पता  चला ।
खूब   तड़पे  वो   भी   मुझसे  जुदा   होकर ।।

4 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा लिखा है मेरा भी देखे http://gyankablog.blogspot.com/

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  2. बहुत ही अच्छी लगी मुझे रचना........शुभकामनायें ।
    सुबह सुबह मन प्रसन्न हुआ रचना पढ़कर !

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