शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014

मेरा मासूम गोली का निवाला नहीं था ।।

आज  उसके  बिना  घर में  उजाला  नहीं था ।
मेरा  मासूम   गोली  का  निवाला  नहीं  था ।।
प्यारी हरकतों को उसकी  नहीं  कोई भूलता ।
था   बाबा   के  गले  में  वो   झूला   झूलता ।।
उसके  जैसा  घर   में   कोई  माला  नहीं  था ।
मेरा  मासूम   गोली  का  निवाला  नहीं  था ।।
याद  कर - कर वो  माँ  को  बहुत रोया होगा ।
बिना  देखे   वो  माँ  को   कैसे   सोया  होगा ।।
उसके  जैसा  कोई   भोला - भाला   नहीं  था ।
मेरा   मासूम   गोली  का  निवाला  नहीं  था ।।
ज़ालिम एक - एक करके बच्चों को काटते होंगे ।
अपनी ज़िन्दगी की भीख  बच्चे माँगते होंगे ।।
एक  भी  के  दिल में  अल्ला  ताला  नहीं  था ।
मेरा   मासूम  गोली  का  निवाला  नहीं  था ।।


अश्रुपूरित हृदय से श्रद्धांजली उन बच्चों के लिए 
जो आतंकवादियों के द्धारा शहीद हो गये !

2 टिप्‍पणियां:

  1. काश, इन आतंकियों को पता होता की वे क्या कर रहे है!!

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    1. दीदी ! इन आतंकवादियों को सब पता है कि वो क्या कर रहे हैं।

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