गुरुवार, 13 नवंबर 2014

लाख कोशिशों बाद वो भुलाया नहीं गया।।

चित्र स्रोत - गूगल
इतिहास    हमसे    मिटाया    नहीं    गया ।
उसकी यादों का कागज़ जलाया नहीं गया।।
उसने  तो  भुला   दिया  आसानी  से  मुझे ।
लाख  कोशिशों बाद वो भुलाया नहीं गया।।
क्या   निभाते   वो   साथ    ज़िन्दगी   का ।
जिनसे  एक वादा भी  निभाया  नहीं गया ।।
हम तो कन्धों पे लिए फिरते हैं दर्द ज़माने का ।
एक ज़नाज़ा भी मेरा उनसे उठाया नहीं गया ।।
मेरे    चाहत    की    ये    तासीर    थी    जो ।
उसपे इल्ज़ाम बेवफ़ा का लगाया नहीं गया ।।
उनसे तुम  क्या उम्मीद करते हो  "सागर" ।
जिनसे  दुआ में भी हाथ  उठाया नहीं गया ।।


4 टिप्‍पणियां:

  1. बहूत सून्दर सागर भाई

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  2. एक एक शब्द रग में समाता हुआ..!!

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    1. संजय जी, मैं आपका दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। आप जैसे पाठकों के कंमेंट्स मुझे बहुत ख़ुशी देते है

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