गुरुवार, 6 नवंबर 2014

जोड़ते न दिल तो टूटा न होता ।



चित्र स्रोत - गूगल


जोड़ते   न   दिल  तो  टूटा  न   होता ।
पकड़ते  न दामन तो  छूटा  न होता ।।
तक़दीर    मेरी    गर   अमीर    होती ।
सारी दुनियाँ की मुझपे जागीर होती ।।
तो  मेरा  यार  मुझसे  रूठा  न  होता ।
जोड़ते  न  दिल   तो  टूटा  न  होता ।।
अपने  महबूब  से  न कोई  दूर होता ।
शीशे जैसा  दिल था न वो चूर होता ।।
दीवानों से काम कोई अनूठा न होता ।
जोड़ते  न  दिल  तो  टूटा  न  होता ।।
गर किसी  पर भी न  ऐतबार  करते ।
तन्हा  रह  लेते  यूँ  न प्यार  करते ।।
तो मेरा घर अपनों  ने लूटा  न होता ।
जोड़ते  न  दिल  तो  टूटा  न  होता ।।
पकड़ते  न दामन तो  छूटा  न होता ।।

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (07.11.2014) को "पैगाम सद्भाव का" (चर्चा अंक-1790)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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    1. जरूर।
      मेरा ब्लॉग विजिट करने के लिए धन्यवाद।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  3. उत्तर
    1. धन्यवाद परी जी ! आपने मेरे गीत की तारीफ़ करके मेरा हौसला बढ़ाया।

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