गुरुवार, 15 जनवरी 2015

मुबारक़ हो तुमको जनम दिन तुम्हारा।।

गहरी  झील ने  हमारी  किया है इशारा ।
मुबारक़ हो तुमको जनम दिन तुम्हारा ।।
निकले हैं जफ्ज़ दिल से  क़बूल कर लो ।
इनके सिवा दुनियाँ में कुछ नहीं हमारा ।।
भीड़ में जिसको  तलाशे  नज़र तुम्हारी ।
नज़रों का तुम्हारी वो बन जाये नज़ारा ।।
हँसते  हुए   दिल  को   जो  रुला   जाये ।
वो  पल  ज़िन्दगी  में  न  आये  दुबारा ।।
भूल   कर   उनको    कभी   न   रुलाना ।
तुम   हो   जिनकी   आँखों   का   तारा ।।
करके मोहब्बत हमसे नफ़रत न करना ।
तुम्हारे   सिवा  यहाँ   कौन   है  हमारा ।।
मोहब्बत  करें  तेरी   इबादत  करें  हम ।
तूफानों में भी तुझको मिल जाये किनारा ।।
न    हो    मुलाकात     कभी    आख़िरी ।
जुदाई   के   बाद   मिलो   तुम   दुबारा ।।
टूटा  जो   दिल   मेरा   तो   क्या   हुआ ।
दिल के  लिए  तो तूँ  अब  भी  है प्यारा ।।
मुबारक़ हो तुमको जनम दिन तुम्हारा ।।

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (16.01.2015) को "अजनबी देश" (चर्चा अंक-1860)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत - बहुत धन्यवाद आदरणीय राजेन्द्र जी !

      हटाएं
  2. जनम दिन की शुभ मुबारक लाजवाब अंदाज़ में ...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत - बहुत धन्यवाद आदरणीय दिगंबर जी !

      हटाएं
  3. उत्तर
    1. बहुत - बहुत धन्यवाद आदरणीय राजीव जी !

      हटाएं