शनिवार, 24 जनवरी 2015

देखो हमारा भारत श्रंगार कर रहा ।।

दुश्मन    तो   मुल्क   पे   वार   कर  रहा ।
देखो   हमारा   भारत   श्रंगार   कर   रहा ।।
इस मुल्क का हर बच्चा ऐसा काम करेगा ।
विश्व   में    भारत     का    नाम   करेगा ।।
आने  वाले  कल  का  इन्तज़ार  कर  रहा ।
देखो   हमारा   भारत   श्रंगार   कर   रहा ।।
सोने की चिड़िया की रखना तुम निगरानी ।
इस काम के लिए  चाहे  हो  जाये क़ुर्बानी ।।
दुश्मन  तो सीमा  मुल्क़ की  पार  कर रहा ।
देखो   हमारा    भारत   श्रंगार   कर   रहा ।।
झुकने को पाकिस्तान को मज़बूर कर देना ।
शीशे की तरह इसको  चकनाचूर कर देना ।।
बेशरम  तो   भारत   से  टकरार   कर  रहा ।
देखो    हमारा   भारत    श्रंगार   कर   रहा ।।
भारत   के   वीर   मौत  से  डरते   नहीं   है ।
मर जायें  चाहे  फिर  भी ये  मरते  नहीं  हैं ।।
भारत का हर इन्सां  मौत से प्यार कर रहा ।
देखो   हमारा    भारत    श्रंगार   कर   रहा ।।
शहीदों के लिए तिरंगा  है कपड़ा कफ़न का ।
बागियों  ने   देखा  जो   सपना   वतन  का ।।
आज़ाद   हिन्द   सपना   साकार   कर  रहा ।
देखो   हमारा    भारत    श्रंगार    कर   रहा ।।
शहीदों  की   याद   जब  आती   ज़िन्दगानी ।
दिल से दुवा निकलती आँखों से गिरता पानी ।।
शहीदों को नमन "सागर" बारम्बार कर रहा ।
देखो    हमारा    भारत    श्रंगार   कर   रहा ।।

2 टिप्‍पणियां:

  1. मात्री भूमि के चरणों में सुन्दर ओजस्वी रचना ...
    बहुत सुन्दर भाव ...

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