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सोमवार, 6 अप्रैल 2015

आसमान का सीना चीर के आता प्रकाश है ।

आसमान   का   सीना   चीर   के   आता   प्रकाश   है ।
धरती    के    ऊपर     साया    करता    आकाश    है ।।
कभी भौतिकी कभी जैविकी, रसायन में उपयोग हुआ ।
विज्ञान  की  हर  शाखा  में  प्रकाश  का प्रयोग  हुआ ।।
विज्ञान  के  इमारत  की  नींव  का  नाम   प्रकाश  है ।
धरती    के    ऊपर    साया     करता    आकाश    है ।।
प्रकाश   संश्लेषण   करके   भोजन  पौधे   बनाते  हैं ।
पृथ्वी   के   प्राणी    सारे    वही   भोजन    खाते   हैं ।।
जितना जरूरी  ऑक्सी  पानी  उतना  ही  प्रकाश  है ।
धरती    के   ऊपर    साया     करता     आकाश   है ।।
सब   कुछ  काला   होता   हर  तरफ़   अँधेरा   होता ।
उम्मीद   किरण   न   होती  न   कभी  सवेरा  होता ।।
ख़ूबसूरती    तब   तक   है   जब    तक   प्रकाश   है ।
धरती     के    ऊपर    साया    करता    आकाश   है ।।
तुम   ज़िन्दगी  को   अपनी   विज्ञानमय   कर  लो ।
छोड़ो  अन्धविश्वास  जीवन  प्रकाशमय   कर  लो ।।
 "सागर" तो गुज़ारिश करता "पी वी एस" प्रयास है ।
धरती    के    ऊपर    साया    करता    आकाश   है ।।

रविवार, 1 फ़रवरी 2015

हाइड्रोजन ऑक्सीजन मिलकर जो बनता वो पानी है ।

हाइड्रोजन  ऑक्सीजन  मिलकर  जो  बनता  वो  पानी  है ।
इसका  महत्व  इतना  है  विज्ञान  भी  इसकी  दिवानी  है ।।
जीवन    की   हर    क्रिया    पूरी    होती   है   जीवद्रव   में ।
जल की हिफाज़त करना लिखा  है  हम सब के कर्तव्य में ।।
ब्रह्माण्ड  के जिस  हिस्से में  पानी  वहीं  पे ज़िन्दगानी है ।
हाइड्रोजन  ऑक्सीजन  मिलकर  जो  बनता वो  पानी  है ।।
जीवद्रव  की रचना करने में  पानी  का योगदान ज्यादा है ।
जीवन में  पानी ऑक्सीजन का  महत्व  आधा - आधा  है ।।
रूप    नया    दिया    हमने    लेकिन    बात    पुरानी    है ।
हाइड्रोजन  ऑक्सीजन  मिलकर  जो  बनता  वो  पानी  है ।।
पानी  से  बिजली  बनती  है  जीवन  को  रोशन  करती  है ।
धरती  की गोद  में पानी है  इसलिए  पूज्यनीय  धरती  है ।।
बर्बाद   करो   न   पानी  को   ख़ुशहाली   की   निशानी   है ।
हाइड्रोजन  ऑक्सीजन  मिलकर  जो  बनता  वो  पानी  है ।।
पानी   में   जीवन   होता   है   जीवन   में   पानी   होता  है ।
"सागर "  तुझे  जगाता है  क्यों  कुम्भकरण  सा  सोता  है ।।
पानी की रक्षा नहीं होती  तो  किस काम की तेरी जवानी है ।
हाइड्रोजन  ऑक्सीजन  मिलकर  जो  बनता  वो  पानी  है ।।

शुक्रवार, 5 दिसंबर 2014

ढोंगी कहते इसे ये चमत्कार है।

जो   अदभुद   है  वो  तो  अविष्कार  है ।
ढोंगी   कहते   इसे   ये   चमत्कार   है ।।
गोबर   से    रोशन   गाँव   कर   दिया ।
रददी   से   धन्धा   शुरू    कर    दिया ।।
अन्धविश्वास छोड़ा लोग जागरूक हुए ।
मेरी बातों  ने अब तो  असर कर  दिया ।।
जहाँ   विज्ञान   है   न   कुछ   बेकार   है ।
ढोंगी   कहते   इसे   ये   चमत्कार   है ।।
कोई    सपने   नहीं   अब   अधूरे   बचे ।
इन्सानों   के  क़रीब  तो  सितारे   हुए ।।
विश्वास   जिसने   विज्ञान  पर  किया ।
अरमान     सारे     उनके    पूरे     हुए ।।
विज्ञान     जिसकी     बनी     यार    है ।
ढोंगी   कहते   इसे   ये   चमत्कार   है ।।
इंटरनेट  के  बिना  लोग  खाली  से  हैं ।
फूल खिलते अब सपनों की डाली से हैं ।।
विज्ञान   का   युग  आया   है  जब   से ।
हर दिन लगते हमें अब दिवाली से हैं ।।
आज  मोहताज़  इसका सारा संसार है ।
ढोंगी   कहते   इसे   ये   चमत्कार   है ।।
असंभव   को  संभव   करके   दिखाया ।
माइक्रोचिप में सागर  भरके दिखाया ।।
चाँद को  छूना भी  मुश्किल लगता था ।
चाँद  पर  इंसान  ने  चलके  दिखाया ।।
आज  विज्ञान  की  जय - जय  कार  है ।
ढोंगी   कहते    इसे  ये   चमत्कार   है ।।

बुधवार, 23 जुलाई 2014

विज्ञान से जिसको प्यार हुआ ।

विज्ञान  से जिसको प्यार हुआ ।
उसका     बेड़ा      पार     हुआ ।।
धरती    से    आकाश     तक ।
मानव   का   अधिकार   हुआ ।।
चाँद   पर   जाने   का   सपना ।
विज्ञान  के बल  साकार  हुआ ।।
बैठे   दूर    शख्श   किसी  का ।
घर      बैठे      दीदार      हुआ ।।
रीसाइकिल      के    बाद    में ।
कुछ     नया     तैयार     हुआ ।।
वैज्ञानिक    नज़र    से   देखो ।
कुछ     नहीं     बेकार     हुआ ।।
सारे    जीवों   पर   तो    देखो ।
 विज्ञान   का   उपकार   हुआ ।।