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रविवार, 21 अगस्त 2022

तेरे ख़्वाब आना बंद हुए

 तेरे ख़्वाब आना बंद हुए, सपनो ने आना छोड़ दिया।

तूने भी  बेदर्दी  मुझसे, प्यार का  रिश्ता  तोड़  दिया।।

फिर से  मेरी  आँखों  ने,  हँसना  गाना  सीख  लिया।

जब से  तेरी  याद में  हमने, रोना  धोना  छोड़  दिया।।

रविवार, 10 मई 2015

माँ का शब्द ही मरहम का काम करता है।

माँ का शब्द ही मरहम का काम करता है।
हर सुपुत्र अपने बाप का नाम करता है।।
मिल जाता है सुकुन उसको।
जो माँ की पूजा सुबह शाम करता है।।

शनिवार, 14 मार्च 2015

इतना पता चला फिर नफ़रत नहीं रही ।।

तुमको  हमसे  जब से  मोहब्बत  नहीं रही ।
मेरे  प्यार  में भी  उतनी  शिद्द्त  नहीं रही ।।
अपना बना के छोड़ देना आदत है तुम्हारी ।
इतना  पता  चला  फिर  नफ़रत  नहीं रही ।।

रविवार, 18 जनवरी 2015

हर्फ़ रोने लगते हैं मैं जब भी रोता हूँ ।

मालूम  है  वो  हमारी   किस्मत  में  नहीं  है ।
फिर भी उस से दूर होने को दिल नहीं करता ।।

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कभी      ख़्वाहिश      थी     उसे     पाने     की ।
अब तो लगता है वो मेरा बना रहे वही काफी है ।।

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हर्फ़  रोने  लगते  हैं  मैं  जब  भी  रोता  हूँ ।
सूखे  पेड़   मेरी   कहानी   बयाँ   करते  हैं ।।

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हम अपने  मोहब्बत  की  नुमाइश  नहीं कर पाते ।
और  वो  समझते  हैं  कि  हम  प्यार  नहीं  करते ।।

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सोमवार, 12 जनवरी 2015

तुम ख़ुश रहना हम दुवा करेंगे ।।

मालूम नहीं था  वो जफ़ा करेंगे ।
जिसने कहा था हम वफ़ा करेंगे ।।
दूर  मुझसे  होकर  वो  कहते  हैं ।
तुम ख़ुश रहना  हम  दुवा करेंगे ।।

शनिवार, 10 जनवरी 2015

पर मेरा तो यादों ने जीना मुश्किल कर दिया ।।

नाम उसके अपनी साँसे धड़कन दिल कर दिया ।
ख़ुद डूब गये और उसके पास साहिल कर दिया ।।
कहते हैं लोग  कि यादें जीने का सहारा होती  हैं ।
पर  मेरा तो यादों ने  जीना मुश्किल  कर दिया ।।

गुरुवार, 8 जनवरी 2015

उसने कहा था कि अपनी तस्वीर भेज दो ।

मेरी गुज़ारिश पर भी मुझसे मुलाक़ात नहीं करती ।
ख़ूब   किया   याद   अब   याद   भी  नहीं   करती ।।
उसने   कहा   था  कि   अपनी   तस्वीर   भेज  दो ।
अब   कैसे   भेजूँ  जब  वो   बात  ही  नहीं  करती ।।

शनिवार, 3 जनवरी 2015

खुशियों की नई किरण लेकर आया वर्ष नूतन ।

खुशियों  की  नई  किरण  लेकर  आया  वर्ष  नूतन ।
इतना  खूबसूरत  हो  वर्ष  जितनी  होती  है  दुल्हन ।।
इन खुशियों की किरण से आपका उज्जवल हो भविष्य ।
आपकी   छवि   फैले  जहाँ  हों   धरती  और  गगन ।।

देखने को मिला जो हमको नया वर्ष है ।

देखने को मिला जो हमको नया वर्ष है ।
कैसे बतायें दिल में मेरे कितना हर्ष है ।।
पाकर के बधाई प्रियजनों की झूमने लगे।
झूमते  हम  ऐसे  जैसे  पी  ली  चर्स  है ।।

गुजरा हुआ साल तो ख़्वाब था ।

गुजरा     हुआ     साल     तो     ख़्वाब     था ।
नये   साल   के   इंतज़ार    में   दिल   बेताब   था ।।
नये     साल     की     हक़ीक़त     हो     ऐसी ।
तुम निकलो जिधर से लोग समझें कोई महताब था ।।

गुरुवार, 1 जनवरी 2015

आज 2015 की ख़ुशी और 2014 की है कश्मकश ।

आज   2015   की   ख़ुशी  और  2014   की   है   कश्मकश ।
हँसकर शुरू करो दिन साल का  ये साल भी बीते हँस - हँस ।।
जिसके साथ वक़्त गुजारो उसे भूलना आसान कहाँ होता है ।
मुश्किल हो रहा तुझे भूलना  14  तू बसा  है मेरे नस - नस ।।

बुधवार, 31 दिसंबर 2014

दिल नहीं करता मेरे हमसफ़र तुझे कैसे रुख़सत करें ।।

जो   न  चाहे   मुझे   उनसे   हम   कैसे   मोहब्बत   करें ।
जिसकी फ़ितरत ही हो ऐसी तो फिर कैसे शिकायत करें ।।
वो  जब  याद  आयेगा  तू  भी बहुत याद  आयेगा  2014 ।
दिल  नहीं   करता मेरे हमसफ़र  तुझे  कैसे रुख़सत करें ।।

गुरुवार, 25 दिसंबर 2014

वो मेरा फिर से हो जाये ।

काश ! कुछ ऐसा हो जाये ।
वो मेरा फिर से  हो जाये ।।
मिल जाये मुझे यार मेरा ।
चाहे  सब कुछ  खो जाये ।।

रविवार, 21 दिसंबर 2014

खूब तड़पे वो भी मुझसे जुदा होकर ।

चित्र स्रोत :- गूगल

दास्तान - ए - हक़ीक़त उसने की बयाँ रोकर ।
हम   जाग   गए   गहरी   नींद   से   सोकर ।।
फ़ना   होने   से  पहले   मुझको   पता  चला ।
खूब   तड़पे  वो   भी   मुझसे  जुदा   होकर ।।

शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014

वो झूठा, बेवफ़ा, हरजाई था देर में समझ आया ।।

मुझसे  किया  वादा   किसी  और  से  निभाया ।
हँसने  को कहा  हमसे  किसी  और  को हँसाया ।।
उसे मासूम, शरीफ़ समझकर  प्यार करने लगे ।
वो झूठा, बेवफ़ा, हरजाई था देर में समझ आया ।।

बुधवार, 17 दिसंबर 2014

ज़ख्म पर मरहम लगाना पड़ता है ।

ज़ख्म  पर मरहम  लगाना  पड़ता  है ।
दर्द   में   भी   मुस्कुराना   पड़ता   है ।।
न हो  ग़म मुझको  तेरी  बेवफ़ाई  का ।
इसलिए शराब को भी पीना पड़ता है ।।

नहीं रखते हो अगर खाने का शौक - ए - फ़रेब ।

नहीं रखते हो अगर खाने का  शौक - ए - फ़रेब ।
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तो भरोसा मत करना किसी पर खुद से ज्यादा ।।

मंगलवार, 16 दिसंबर 2014

तुझको चाहा हमने बेहिसाब है ।

मेरे जीने का सहारा तो शराब है ।
दुनियाँ  कहती  इसे ये ख़राब है ।।
मयकदे  का  पता  बताने  वाले ।
तुझको चाहा हमने  बेहिसाब है ।।

सोमवार, 15 दिसंबर 2014

किसी शख़्श की इतनी तारीफ़ मत करना कभी ।

किसी शख़्श की इतनी तारीफ़ मत करना कभी ।
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कि वो बेवफ़ा था  फिर  इतना भी न  कह सको ।।

बुधवार, 10 दिसंबर 2014

ज़िन्दगी में कोई इस क़दर न आये ।

ज़िन्दगी  में  कोई  इस क़दर  न आये ।
कि जाने पर ज़िन्दगी अधूरी हो जाये ।।
तुम ऐसा कुछ  तो  हमसे कह दो यार ।
कि  मुझे   तुमसे   नफ़रत   हो  जाये ।।