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बुधवार, 27 जून 2018

जो कहते थे जिस्म में अपने सागर - सागर लिखवा लूंगी।

मेरे साथ  बिताए पल  वो  कितनी जल्दी भूल गए।
खुद किये थे वादे हमसे  खुद ही अब वो भूल गए।।
मैं ज़िन्दगी  था  उसकी  मेरे  दिल में  वो रहती थी।
हमको तो सब याद है  बस वही ठिकाना भूल गए।।
रात - रात भर  जागकर  हम  उनसे बाते  करते थे।
वादे  भूले  सपने  भूले   वो  मेरी  बातें  भूल   गए।।
आँखों में आँसू देख के उसके प्यार करने लगता हूँ।
उसने दिए जो  धोखे हमको  सारे धोखे  भूल गए।।
छोटी हो या हो बड़ी  हर ख़्वाहिश उसकी  पूरी की।
मैंने उसको इतना चाहा  वो कैसे  मुझको भूल गए ?
जो कहते थे जिस्म में अपने सागर - सागर लिखवा लूंगी।
प्यार  को   भूले   मेरे  वो   नाम  हमारा  भूल  गए।।

शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017

मेरा नहीं तुम्हें था गैरों के खोने का ग़म ।

मेरा  नहीं  तुम्हें   था   गैरों  के  खोने  का  ग़म ।
शायद  मेरा  प्यार   कहीं   पड़  गया  है  कम ।।
देखा  तुझे   रोमांस  करते   गैरों  के  साथ  में ।
नशें फटीं, उबाल आया, हुआ ख़ून मेरा गरम ।।
ज़िस्म   तुम्हारा   है   या   कोई   धरम   शाला ।
कितनी  बेशरम  हो  तुम्हें  आती  नहीं  शरम ।।
मैं बुरा बन गया हूँ  तेरा ऐतबार करते - करते ।
ये  सपना  रह  गया अब  बहुत  अच्छे  थे हम ।।
ज़िन्दगी   से    तुम्हारी   गर    मैं   चला   गया ।
करके  याद  हमको  तुम  रोते रहोगे  हरदम ।।
तुम  जान  हमारी  थीं   तुम  जान  हमारी  हो ।
मुझे लगता बुरा बहुत है  ये सब छोड़ो सनम ।।

गुरुवार, 3 नवंबर 2016

आज डोली उसकी घर को मेरे पार कर गयी

मेरे   दिल  के  वो  टुकड़े   हजार  कर   गयी ।
मेरी   ज़िन्दगी  में  घुस  के  अत्याचार   गयी ।।
अब तो ज़िन्दगी का आखिरी मेला भी ख़तम हुआ ।
आज डोली उसकी घर को मेरे पार कर गयी ।।
ज़िन्दगी   ने    जिससे    भी   की    बेवफाई ।
मौत  की   सहेली  उससे   प्यार   कर   गयी ।।
उसका  मासूम  चेहरा  मैं  कैसे  भूल  सकता ।
उसकी  तस्वीर  जहन  में  आकार  कर  गयी ।।
भले  किसी  और  का  दिल  जीत  लिया  हो ।
मेरे    दिल   से   तो   वो   हार    कर    गयी ।।
ये मोहब्बत का कैसा तोहफा सौगात में दिया ।
वो   दुश्मन   भी   मेरे   दो   चार  कर   गयी ।।
मेरे   उपापचय   का   न   कोई   उपचार   है ।
मेरा   हमदर्द    बनकर    बीमार   कर   गयी ।।
कुछ  दिन  ही  सही  लेकिन  प्यार  तो किया ।
एक  सपना  था  मेरा  वो  साकार  कर गयी ।।

बुधवार, 14 अक्टूबर 2015

मुझे प्यार का मतलब समझा दो

कुछ - कुछ होता है दिल में, मेरी उलझन को सुलझा दो ।
कहते किसे हैं प्यार मुझे,  प्यार का मतलब समझा दो ।।
अब तुम छोड़ो रीति रिवाज़, अपना होता नहीं है समाज ।
तुम मुझसे मिलने आ जाओ, सारी दुनियाँ को ठुकरा दो।।
मुझे  रब  के  दर्शन  करने  का   शौक  नहीं  है  बिल्कुल ।
मेरे  यार  में  रब  दिखता है  मुझे  यार  के  दर्श करा दो ।।
कहीं   ऐसा   न   हो   कि   फ़िर   देर   बहुत   हो   जाये ।
करते  हो  जो  प्यार   मुझे   तो  जल्दी  से  अपना  लो ।।
मुझे  याद   नहीं   है   कब  से   हम   हँसना   भूल   गए ।
पहले    के   जैसा    मुझे    फिर   से   तुम    हँसा    दो ।।
तुम   भी  करते   प्यार  मुझे   एक   बार   तो   कह  दो ।
मेरी  खुशियाँ  वापस  कर दो  मेरा  चैन  भी  लौटा  दो ।।
आज    तक    तुमको   मैं     समझ   नहीं    पाया    हूँ ।
तुम  मेरी   कौन   लगती  हो   असली  बात   बता  दो ।।

शनिवार, 2 मई 2015

आशियाना न बना गर तेरी गली में ।

चित्र स्रोत - गूगल
आशियाना   न   बना   गर   तेरी   गली   में ।
क़ब्र  के   लिए  जगह   मिले   तेरी  गली  में ।।
होगा   दीदार    तुम्हारा    किसी   बहाने   से ।
सोचकर  आशिक़   भटकता   तेरी  गली  में ।।
घर  का   तेरे  पता   मालूम   नहीं   फ़िर  भी ।
मंजिल   मिलेगी    हमको    तेरी   गली   में ।।
ख़ुदा   के    दर    पे    फ़रियाद    क्या    करें ।
हमको  नज़र  आती  ज़न्नत  तेरी  गली  में ।।
न मक्का न मदीना न काशी की ख़्वाहिश है ।
निकले   हमारी   जान   भी   तेरी   गली  में ।।

रविवार, 22 फ़रवरी 2015

उससे हमारा रिश्ता कुछ अज़ीब सा है।

उससे    हमारा    रिश्ता   कुछ   अज़ीब   सा   है।
मेरी   ज़िन्दगी   का  लगता   वो  नसीब  सा  है।।
बहुत सोचता है इज़हार - ऐ - मोहब्बत से पहले।
प्यार    देने    में    वो    थोडा    गरीब    सा   है।।
दूरी   इतनी   कि   मिल   पाना   आसाँ  नहीं  है।
फिर    भी   वो   मेरे   दिल   के   करीब   सा   है।।
उसके   खो   जाने   का   डर   रहता   है   हमेशा।
हर    शख्स    मुझे    लगता    रक़ीब    सा    है।।
मै  मौला  की  इनायत  का  तलबगार  नहीं  हूँ।
मेरा     प्यार     मेरे    लिये     हबीब    सा    है।।

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

धोखा मुझे दिया तूने क्यों बेवफ़ा ।।

आती     है     याद     तेरी    ओ     बेवफा ।
जाती     है    जान    मेरी    ओ     बेवफा ।।
पूछते  हैं  दिल  के  टुकड़े   बता  दो  मुझे ।
धोखा   मुझे   दिया   तूने   क्यों   बेवफ़ा ।।
अभी चलती है धड़कन न छोड़ जाओ तुम ।
हम मर जायें बिना दीद के न दो ये सज़ा ।।
कर   पाया   न   ठीक   डॉक्टर   ने   मुझे ।
दो दर्शन मुझे  तो  मिल  जायेगी  शिफ़ा ।।
ख़ुदा  का   उठे   हाथ   हिफाज़त   में  तेरे ।
की     आरज़ू     हमने     कितने    दफ़ा ।।

मंगलवार, 10 फ़रवरी 2015

निकल गया वो ज़माना जब तुम्हारा सज़दा करते थे ।

निकल गया वो ज़माना जब तुम्हारा सज़दा करते थे ।
तुम  भी  नहीं  थे  बेवफ़ा  तब  हमसे  वफ़ा  करते  थे ।।
जुदाई  का  हर  लम्हा  गुज़रता  था  तेरी  इबादत  में ।
तुम  ख़ुश  रहना  हमेशा  बस  इतनी  दुवा  करते  थे ।।
तड़पता  था  तेरी  याद  में  जब   बेबस  हमारा  दिल ।
नाम   तुम्हारा    लिखकर    चूम   लिया   करते   थे ।।
ज़िन्दगी    में    मेरे    क्या    थी    अहमियत    तेरी ।
जब   दर्द   होता   था   तेरा   नाम   लिया   करते  थे ।।
मेरी  ज़िन्दगी  को रोशन  तुम करते थे  दीप बनकर ।
अँधेरों   में   भी   तुझको   पहचान  लिया   करते  थे ।।
कैसे   करूँ   यक़ीन   मैं   तेरी   सादगी   का  फिर  से ।
तुम  भरोसे   का  मेरे   क़त्लेआम   किया   करते  थे ।।

गुरुवार, 15 जनवरी 2015

मुबारक़ हो तुमको जनम दिन तुम्हारा।।

गहरी  झील ने  हमारी  किया है इशारा ।
मुबारक़ हो तुमको जनम दिन तुम्हारा ।।
निकले हैं जफ्ज़ दिल से  क़बूल कर लो ।
इनके सिवा दुनियाँ में कुछ नहीं हमारा ।।
भीड़ में जिसको  तलाशे  नज़र तुम्हारी ।
नज़रों का तुम्हारी वो बन जाये नज़ारा ।।
हँसते  हुए   दिल  को   जो  रुला   जाये ।
वो  पल  ज़िन्दगी  में  न  आये  दुबारा ।।
भूल   कर   उनको    कभी   न   रुलाना ।
तुम   हो   जिनकी   आँखों   का   तारा ।।
करके मोहब्बत हमसे नफ़रत न करना ।
तुम्हारे   सिवा  यहाँ   कौन   है  हमारा ।।
मोहब्बत  करें  तेरी   इबादत  करें  हम ।
तूफानों में भी तुझको मिल जाये किनारा ।।
न    हो    मुलाकात     कभी    आख़िरी ।
जुदाई   के   बाद   मिलो   तुम   दुबारा ।।
टूटा  जो   दिल   मेरा   तो   क्या   हुआ ।
दिल के  लिए  तो तूँ  अब  भी  है प्यारा ।।
मुबारक़ हो तुमको जनम दिन तुम्हारा ।।

मंगलवार, 13 जनवरी 2015

कभी माँगने लगे न वो तस्वीर अपनी ।

यादों   को   उसकी    हम   भुला   न   सके ।
किसी  और  से   दिल  को  लगा  न   सके ।।
कभी  माँगने  लगे  न  वो  तस्वीर  अपनी ।
यही   सोच   कर    हम    जला   न    सके ।।
उसके बिना  ज़िन्दा रहना मुश्किल है मेरा ।
हैं   हालात   ऐसे   उसको   बुला   न   सके ।।
उसके    खयालों    में   मैं    दूर   हो   गया ।
आज  भी  करते  प्यार  उसे  बता  न  सके ।।
बहुत  हँसते थे  जब वो  हमसफ़र  था मेरा ।
तन्हा  हुए  जब से  ख़ुद  को  हँसा  न सके ।।
उसने  कहा  था  खूब  हँसा  करो   "सागर" ।
जब याद उसकी आयी  आँसू  छुपा न सके ।।

मंगलवार, 6 जनवरी 2015

वक़्त के साथ में क्या - क्या बदल गया ।

वक़्त  के  साथ  में  क्या  -  क्या  बदल   गया ।
हम  वही  तुम  वही  बस   वक़्त   बदल  गया ।।
बेदर्द    इस   ज़माने   में    ज़िन्दा   वही   रहा ।
वक़्त    से   पहले    जो    भी    सँभल    गया ।।
ऐतबार   नहीं   मुझको   अब   रहा   किसी   पे ।
धोखा  दिया  उसने  जो ज़िन्दगी  बदल  गया ।।
कुछ  नहीं  है दुनियाँ में  बस वक़्त का है  खेल ।
हाथ कुछ नहीं आयेगा गर वक़्त निकल गया ।।
गुलशन में क्यों ढूंढ़ते  अब  कलियों की  रानी ।
जब  से  आयी   बहार   हर  फूल  खिल   गया ।।
क्यों  हो रहे उदास  तुम  इस तरह से  "सागर" ?
तुम्हें    तो   तुम्हारा    महबूब    मिल    गया ।।

सोमवार, 5 जनवरी 2015

शिक्षा बिना काम नहीं चलता ।।

बूँद - बूँद से घड़ा है भरता । शिक्षा बिना  काम  नहीं चलता ।।
शुरू करो न काम ऐसा । जिसको करने में दिल नहीं लगता ।।
कश्ती   पार   होती  उसकी । तूफ़ानों   से  जो   नहीं   डरता ।।
जीना  दूभर  होता  उसका । रोता  ज्यादा  कम  जो  हँसता ।।
जीवन तो कट ही जाता है । साथ में जब कोई अपना रहता ।।
जानवरों से बद्तर वो है । करुणा, दया जिसमे नहीं  बसता ।।

रविवार, 4 जनवरी 2015

कि "सागर" भी अब तो समन्दर हुआ ।।

ख़ुदा   का   आज   पैदा    पैग़म्बर   हुआ ।
नबी   का    आख़िरी    ये   नम्बर   हुआ ।।
मोहम्मद   ने   पहला   क़दम   जब  रखा ।
जमीं   ख़ुश    हुयी   और   अम्बर   हुआ ।।
भाई - चारे से रहना जब सिखलाया उसने ।
खुराफ़ातियों का मन फिर दिगम्बर हुआ ।।
बज़्म - ए - नबी  की जो  आया  कभी  भी ।
वो     पत्थर    नहीं    संगमरमर     हुआ ।।
ख़ुदा      ने     मुझको      इतना      दिया ।
कि  "सागर"  भी अब तो  समन्दर  हुआ ।।


सभी को जश्न - ए - ईद मिलाद - उन - नबी मुबारक़ हो।

गुरुवार, 1 जनवरी 2015

हँसकर के पन्द्रह तेरा स्वागत किया है ।

रोकर  के  चौदह  को  रुख़सत  किया  है ।
हँसकर के पन्द्रह तेरा  स्वागत किया है ।।
तहे  दिल से उसको  भी  शुभकामना दी ।
साल भर जिसने मुझसे नफ़रत किया है ।।
नये  साल तू  उसके अरमान  पूरे करना ।
जिसने मुझसे कभी  मोहब्बत  किया है ।।
मेरे  अपनों  को  तू   कभी  रुलाना  नहीं ।
तुझसे यही आरज़ू और हसरत किया है ।।
मेरे ख़ुदा  यार से  मुझको  ऐसे मिलाना ।
जैसे पानी और चीनी को शरबत किया है ।।

शनिवार, 27 दिसंबर 2014

जब कोई धोखा देगा तुम्हें तब याद करोगी मुझे ।

जब   कोई   धोखा   देगा   तुम्हें   तब   याद   करोगी  मुझे ।
अपने  पराये   सा  सलूक  करेंगे  तब  याद   करोगी  मुझे ।।
मेरे    होते   हुए   भी   तुम   गैरों   में   मशगूल   हो   आज ।
मैं    चला    जाऊँगा     जब     तब    याद   करोगी    मुझे ।।
इबादतों    के    बाद    भी    मैं    लौट    कर   नहीं   आऊँगा ।
तुम्हारे आसुँओं को मजाक बनायेंगे सभी तब याद करोगी मुझे ।।
बाकी     तो      भूखे      शिकारी     हैं    यहाँ     जिस्म    के ।
अहसास    होगा    ये    जिस    दिन    याद    करोगी    मुझे ।।
मैं    धोखा    देती    रही   फिर   भी   वो   चाहता   रहा   मुझे ।
याद     आयेगा    ये    जिस    दिन    याद    करोगी     मुझे ।।
कितने   नादान   हो   तुम   हीरे   की   परख   नहीं   कर  पाये ।
जब   फिसल   जायेगा   हाथों   से   तब   याद   करोगी   मुझे ।।
खुद  तो   रोता  था  लेकिन   मेरे  हँसने  की  दुवा  करता  था ।
ख़याल    आयेगा    ये    जिस    दिन    याद   करोगी   मुझे ।।
कभी   आया   था    "सागर"   ज़िन्दगी    में    ख़ुशियों   का ।
याद    आयेगा    नाम    मेरा    तब    याद    करोगी    मुझे ।।

बुधवार, 24 दिसंबर 2014

तुम मुझको भूल जाओ मैं तुमको भूल जाता हूँ ।

तुम मुझको भूल जाओ मैं तुमको भूल जाता हूँ ।
मैं  सपना  समझकर  तेरे  वादे  भूल  जाता  हूँ ।।
वो पूछती  है  जब हमसे  प्यार  करते  हो  क्या ?
मैं   हर   बार   अपना   सच   क़बूल   जाता   हूँ ।।
हमने किसी का दिल कभी नहीं दुखाया फिर भी ।
हर  कदम  पे  ज़िन्दगी  के  मैं  बबूल  पाता  हूँ ।।
दौलत से  मेरे प्यार की  तुलना नहीं हो  सकती ।
बेशकीमती  प्यार का मैं  तुमको फूल  लाता हूँ ।।
उसके आने की उम्मीद में सोया नहीं करती आँखें ।
मुझको तो  नींद  आती  जब  कैप्सूल  खाता  हूँ ।।
असातिज़ा  भी कहते  क्या  सोचते हो  "सागर" ।
ऐसे  सवाल   होते   मैं  जब   स्कूल   जाता   हूँ ।।

मंगलवार, 23 दिसंबर 2014

शराफ़त का ऐलान करने वाले बेवफ़ा हो रहे हैं ।।

मुझको   अपना   बनाकर   वो  जुदा  हो  रहे  हैं ।
मेरी   इबादत   की   वो   तो   दुवा   हो   रहे  हैं ।।
वक़्त ने  हमको  आज   कहाँ,  खड़ा  कर  दिया ।
जिस से विदा नहीं चाहते थे  अलविदा हो रहे हैं ।।
इस फ़रेबी दुनियाँ में किस पर भरोसा किया जाये ।
शराफ़त  का ऐलान  करने वाले बेवफ़ा हो रहे हैं ।।
इससे   बड़ा   दर्द   और   क्या   मिलेगा   हमको ।
वो    ख़ुश    हैं    की    हम   फ़ना    हो    रहे   हैं ।।
तेरे प्यार को ठुकराना "सागर" लाज़मी है उनका ।
सारी दुनियाँ के आशिक़  उन पर फ़िदा हो रहे हैं ।।

गुरुवार, 27 नवंबर 2014

हमने ज़िन्दगी अपनी उसको समझा ।

चित्र  स्रोत :- गूगल
हमने उससे मोहब्बत की जिसके पास दिल नहीं था ।
ऐसे  दरिया  में  कूंदे  जिसका  साहिल  नहीं  था ।।
हमने     ज़िन्दगी     अपनी     उसको     समझा ।
जिसका    प्यार   भी   मुझे  हासिल   नहीं   था ।।
यह     सोचकर    उसने     मुझे    ठुकरा    दिया ।
उन्हें   लगा   की   मैं   उनके   क़ाबिल   नहीं  था ।।
मेरी नादान  मोहब्बत ने  उसे ख़ुदा  समझ लिया ।
जो   ख़ुदा   तो  दूर  खुद  का  कामिल   नहीं  था ।।
अगर   थी   मेरी   गलती   तो   बस   इतनी   थी ।
मैं  बेवफाओं  की  लिस्ट   में  शामिल  नहीं  था ।।
उस   पर   इल्ज़ाम   क्यों   लगाते   हो   "सागर" ।
वो    महबूब    था    तेरा    क़ातिल    नहीं    था ।।

रविवार, 23 नवंबर 2014

प्यार खुदा से मिलने की तरक़ीब है।

चित्र स्रोत :- गूगल,

मोहब्बत  का  दर्द  भी  कितना अजीब  है ।
ये  दर्द  मिले  जिसको वो  ख़ुशनसीब  है ।।
इश्क   बिना   कोई   जियेगा   किस  तरह ।
जो   दिलवाला   है   वो  रब  के  करीब  है ।।
हिम्मत नहीं है मुझमें  माँगू  खुदा से कैसे ।
नहीं देगा  मुझे सनम मेरा  खुदा  रक़ीब है ।।
दिल तोड़ने वाले ज्यादा हैं जोड़ने वाले कम ।
टूटे  जो  दिल  को  जोड़े  वो  तो  हबीब  है ।।
दौलत  नहीं  है  लेकिन  जो  प्यार  बाँटता ।
बड़ा   है  दिल   जिसका   न   वो  ग़रीब  है ।।
ख़ुदा को चाहने वाले ही  प्यार किया करते ।
प्यार   खुदा   से  मिलने  की   तरक़ीब  है ।।

शनिवार, 22 नवंबर 2014

फिर भी हमारे ज़ख्म तो हँसते रहे ।

सोचा   नहीं   कुछ   बस   उन्हें   चाहते   रहे ।
झूठे    सपनों   में   वो    हमारे   आते   रहे ।।
कितना पत्थर है वो जो हमारी याद न आयी।
उनके   इन्तज़ार  में  हम  राह  ताकते  रहे ।।
खुदा भी बहरा हो गया मेरी फ़रियाद न सुनी ।
हर   फ़रियाद   में   हम   उन्हें   माँगते   रहे ।।
सदियों के बाद आये जब किसी की तलाश में ।
मंजिल  का  तो  पता  नहीं   बस  रास्ते  रहे ।।
हक़ीक़त  तो ये  है कि वो  भी हमें चाहती थी ।
मगर उसके लवों से यह सुनने को तरसते रहे ।।
फ़िराक  का  हर एक  पल  हमें दर्द  देता  रहा ।
फिर   भी    हमारे    ज़ख्म   तो   हँसते   रहे ।।
यादों   को   उनकी    हमने    महफूज़   रखा ।
अरमानों   के   महल   दिल   में   बनाते   रहे ।।