गुरुवार, 18 दिसंबर 2014

एक कोयल ने कौए से किया दोस्ती का इज़हार ।

एक   कोयल   ने   कौए  से  किया   दोस्ती   का  इज़हार ।
कौआ  कहने  लगा  एक दिन  करता हूँ  मैं  तुमसे प्यार ।।
बोली  कोयल  सुनकर इतना  मैं  भी  तो  करती  हूँ  यार ।
उनके प्यार में शिद्द्त इतनी होने लगा ज़न्नत का दीदार ।।
सोचा नहीं  एहसास प्यार  का  देगा ख़ुशियाँ  ऐसी  अपार ।
कुछ दिन बाद में हुआ ब्रेकअप समय था उनका तब बेकार ।।
कोयल  निकली  पत्थर दिल  कौए का  छोड़  दिया  संसार ।
अपना  जीवन  कौए  ने फिर  तन्हा  होकर  दिया  गुजार ।।
हसीन   इतनी   कोयल   थी  उसको   मिला   दूसरा   यार ।
मात  खायी कोयल  अब  की  चला  नहीं उसका  व्यापार ।।
जैसे   को    तैसा   मिलता    है    दुनियाँ   में   एक   बार ।
अब    की    नइया    कोयल    की   डूबी    है    मँझधार ।।
"सागर"    तुमसे    कहता    है     अपने    हाथ    पसार ।
ऐसी    लड़की    से    करना    कभी    नहीं    तुम   प्यार ।।

बुधवार, 17 दिसंबर 2014

ज़ख्म पर मरहम लगाना पड़ता है ।

ज़ख्म  पर मरहम  लगाना  पड़ता  है ।
दर्द   में   भी   मुस्कुराना   पड़ता   है ।।
न हो  ग़म मुझको  तेरी  बेवफ़ाई  का ।
इसलिए शराब को भी पीना पड़ता है ।।

नहीं रखते हो अगर खाने का शौक - ए - फ़रेब ।

नहीं रखते हो अगर खाने का  शौक - ए - फ़रेब ।
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तो भरोसा मत करना किसी पर खुद से ज्यादा ।।

मंगलवार, 16 दिसंबर 2014

तुझको चाहा हमने बेहिसाब है ।

मेरे जीने का सहारा तो शराब है ।
दुनियाँ  कहती  इसे ये ख़राब है ।।
मयकदे  का  पता  बताने  वाले ।
तुझको चाहा हमने  बेहिसाब है ।।

सोमवार, 15 दिसंबर 2014

किसी शख़्श की इतनी तारीफ़ मत करना कभी ।

किसी शख़्श की इतनी तारीफ़ मत करना कभी ।
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कि वो बेवफ़ा था  फिर  इतना भी न  कह सको ।।

बुधवार, 10 दिसंबर 2014

ज़िन्दगी में कोई इस क़दर न आये ।

ज़िन्दगी  में  कोई  इस क़दर  न आये ।
कि जाने पर ज़िन्दगी अधूरी हो जाये ।।
तुम ऐसा कुछ  तो  हमसे कह दो यार ।
कि  मुझे   तुमसे   नफ़रत   हो  जाये ।।

शुक्रवार, 5 दिसंबर 2014

ढोंगी कहते इसे ये चमत्कार है।

जो   अदभुद   है  वो  तो  अविष्कार  है ।
ढोंगी   कहते   इसे   ये   चमत्कार   है ।।
गोबर   से    रोशन   गाँव   कर   दिया ।
रददी   से   धन्धा   शुरू    कर    दिया ।।
अन्धविश्वास छोड़ा लोग जागरूक हुए ।
मेरी बातों  ने अब तो  असर कर  दिया ।।
जहाँ   विज्ञान   है   न   कुछ   बेकार   है ।
ढोंगी   कहते   इसे   ये   चमत्कार   है ।।
कोई    सपने   नहीं   अब   अधूरे   बचे ।
इन्सानों   के  क़रीब  तो  सितारे   हुए ।।
विश्वास   जिसने   विज्ञान  पर  किया ।
अरमान     सारे     उनके    पूरे     हुए ।।
विज्ञान     जिसकी     बनी     यार    है ।
ढोंगी   कहते   इसे   ये   चमत्कार   है ।।
इंटरनेट  के  बिना  लोग  खाली  से  हैं ।
फूल खिलते अब सपनों की डाली से हैं ।।
विज्ञान   का   युग  आया   है  जब   से ।
हर दिन लगते हमें अब दिवाली से हैं ।।
आज  मोहताज़  इसका सारा संसार है ।
ढोंगी   कहते   इसे   ये   चमत्कार   है ।।
असंभव   को  संभव   करके   दिखाया ।
माइक्रोचिप में सागर  भरके दिखाया ।।
चाँद को  छूना भी  मुश्किल लगता था ।
चाँद  पर  इंसान  ने  चलके  दिखाया ।।
आज  विज्ञान  की  जय - जय  कार  है ।
ढोंगी   कहते    इसे  ये   चमत्कार   है ।।